











जालंधर,12 अक्टूबर (भारत विज़न 24)-
जिला बार एसोसिएशन जालंधर के पूर्व सचिव रोहित गंभीर, एडवोकेट ने दिल्ली में वकीलों, जिनमें महिला वकील और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता भी शामिल हैं के साथ कथित धक्का-मुक्की और हिरासत में लिए जाने की घटनाओं की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इस मामले में जॉइंट एक्शन कमेटी ऑफ बार एसोसिएशंस और जिला बार एसोसिएशन, जालंधर द्वारा एक समान और स्पष्ट रुख अपनाते हुए घटना की निंदा करने की सराहना की।उन्होंने कहा कि वकीलों के सम्मान, सुरक्षा और स्वतंत्रता से जुड़ा यह गंभीर मामला है। वकील न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और संविधान की रक्षा, नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा तथा लोगों को न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए वकीलों के साथ किसी भी प्रकार का अनुचित व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।रोहित गंभीर ने कहा कि जॉइंट एक्शन कमेटी द्वारा देश भर की बार एसोसिएशनों से इस घटना की निंदा करने और एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील सराहनीय है। इसी प्रकार, जिला बार एसोसिएशन, जालंधर ने भी इस मामले में मजबूती से अपना पक्ष रखते हुए निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की है।उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को किसी धर्म, जाति, राजनीतिक विचारधारा या व्यक्तिगत मतभेद से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। यह मामला संविधान, कानून के शासन, नागरिकों के मौलिक अधिकारों और वकीलों के सम्मान से जुड़ा है। पूरे देश की बार एसोसिएशनों और बार काउंसिलों को इस विषय पर एकजुट होकर अपनी आवाज उठानी चाहिए।उन्होंने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन से भी अपील की कि वह इस मामले में स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाए तथा संबंधित अधिकारियों के समक्ष मामला उठाकर जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग करे।रोहित गंभीर ने कहा कि जॉइंट एक्शन कमेटी के फैसले के अनुसार, यदि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ संतोषजनक जवाब और उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो कमेटी द्वारा देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और ‘नो वर्क डे’ जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। ऐसे किसी भी कदम पर निर्णय सामूहिक रूप से और शांतिपूर्ण तरीके से लिया जाना चाहिए।उन्होंने अंत में कहा कि वकीलों के सम्मान की रक्षा पूरे न्याय तंत्र के सम्मान की रक्षा है। जब वकीलों के अधिकारों और गरिमा का सवाल हो, तो पूरी कानूनी बिरादरी को आपसी मतभेद भुलाकर एक मंच पर आना चाहिए।हमारी एकता ही हमारी ताकत है। संविधान, न्याय और वकीलों के सम्मान की रक्षा के लिए पूरी कानूनी बिरादरी को एकजुट होकर खड़ा होना होगा।”
