











जालंधर, 25 सितंबर (भारत विज़न 24) जन सुरक्षा को मजबूत करने और अपराध की रोकथाम के उद्देश्य से आम लोगों के लिए खुले संस्थानों को स्वेच्छा से अपनी इमारतों/कॉम्प्लेक्सों को ‘असला मुक्त जोन’ (firearm free zones) घोषित करने की सुविधा देने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए कि ऐसे स्थानों पर प्रवेश करने वाले व्यक्तियों को इस घोषणा के बारे में जानकारी हो, पुलिस कमिश्नर सतिंदर सिंह द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के अधीन प्राप्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए तथा असला अधिनियम, 1959 और असला नियम, 2016 के लागू होने वाले प्रावधानों के तहत आदेश जारी किए गए हैं।आदेशों में कहा गया है कि पुलिस कमिश्नरेट जालंधर के अधिकार-क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला कोई भी कैफे, रेस्टोरेंट, बार, क्लब, ईटिंग हाउस, फूड कोर्ट या जन पहुंच वाला कोई अन्य संस्थान, अपनी इमारत या इसके किसी निर्धारित हिस्से को पुलिस कमिश्नर, जालंधर को निर्धारित फॉर्मेट में अर्जी/सूचना देकर स्वेच्छा से ‘असला-मुक्त जोन’ के रूप में घोषित कर सकता है।संस्थान द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरणों की जांच के बाद कमिश्नरेट उस संस्थान को ‘असला-मुक्त जोन’ के रूप में पंजीकृत करेगा और इसके विवरण इस उद्देश्य के लिए निर्धारित लाइसेंसिंग शाखा/दफ्तर द्वारा रखे जाने वाले रजिस्टर में दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद, पंजीकृत संस्थान को असला नियम, 2016 के लागू प्रावधानों के तहत ‘असला-मुक्त जोन’ माना जाएगा।‘असला-मुक्त जोन’ के रूप में पंजीकृत और अधिसूचित संस्थान में कोई भी व्यक्ति असला अपने साथ नहीं ले जाएगा, अपने पास नहीं रखेगा, प्रदर्शित नहीं करेगा या किसी अन्य तरीके से अंदर नहीं लाएगा। यह पाबंदी तब भी लागू रहेगी भले ही उस व्यक्ति के पास हथियारों का वैध लाइसेंस हो।‘असला-मुक्त जोन’ के रूप में पंजीकृत प्रत्येक संस्थान को प्रत्येक प्रवेश-द्वार पर या उसके पास तथा अन्य प्रमुख स्थानों पर नोटिस लगाना होगा, जिसमें मुख्य रूप से संस्थान के ‘असला मुक्त जोन’ होने और वहां असला लेकर आने की मनाही के बारे में दर्शाया गया हो। पंजीकृत ‘असला-मुक्त जोन’ के मालिक, प्रबंधक या इंचार्ज व्यक्ति को ऐसे उचित कदम उठाने होंगे कि संस्थान में प्रवेश करने वाले लोगों को यह पता हो कि अंदर असला ले जाना मना है।यदि प्रबंधकों को यह पता लगता है कि कोई व्यक्ति पंजीकृत ‘असला-मुक्त जोन’ में असला लेकर आया है, तो उन्हें तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या पुलिस कंट्रोल रूम को सूचित करना होगा और संस्थान के अंदर हथियार को प्रदर्शित करने, लहराने या उपयोग करने की अनुमति नहीं देनी होगी।यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करते हुए किसी पंजीकृत ‘असला-मुक्त जोन’ में असला लेकर जाता पाया जाता है तो पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई करेगी। इस कार्रवाई में असला लाइसेंस और असला कोल रखने या साथ लेकर जाने की परिस्थितियों की जांच शामिल हो सकती है; और जहां भी लागू होता हो, वहां ‘आर्म्स एक्ट, 1959’ और ‘आर्म्स रूल्स, 2016’ के तहत कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें कानून के अनुसार असला और/या असला लाइसेंस जब्त करने की कार्रवाई भी शामिल है।
इस आदेश की कोई भी बात पुलिस, हथियारबंद बलों, सुरक्षा कर्मचारियों या ऐसे किसी भी अन्य व्यक्ति को, हथियार रखने या उपयोग करने से नहीं रोकेगी, जो अपनी ड्यूटी निभाने के दौरान हथियार रखने या उपयोग करने के लिए कानूनी तौर पर अधिकृत है।एक पंजीकृत संस्थान पुलिस कमिश्नर जालंधर को लिखित निवेदन देकर अपने ‘असला-मुक्त जोन’ के दर्जे को वापिस लेने की मांग कर सकता है। पुलिस कमिश्नर ऐसी रजिस्ट्रेशन को वापिस ले सकते हैं या मुअत्तल भी कर सकते हैं, यदि संस्थान रजिस्ट्रेशन की शर्तों का पालन करने में असफल रहता है या जन सुरक्षा के हित में ऐसी कार्रवाई जरूरी समझी जाती है।पुलिस कमिश्नर द्वारा निर्धारित लाइसेंसिंग शाखा/दफ्तर ‘असला-मुक्त जोनों’ के रूप में पंजीकृत सभी संस्थानों का एक अपडेट किया हुआ रजिस्टर/डेटाबेस रखेगी, जिसमें संस्थान का नाम और पता; मालिक/अधिकृत प्रतिनिधि का नाम और संपर्क, रजिस्ट्रेशन की तिथि, घोषणा के अधीन आने वाला क्षेत्र/परिसर, रजिस्ट्रेशन की स्थिति और वापसी/मुअत्तली की तिथि (जो भी लागू हो) की जानकारी शामिल होगी।यह आदेश 20-11-2026 तक लागू रहेगा।

